वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के निचले सदन लोकसभा में वित्त विधेयक 2025 बिल पेश किया और उसमें कहा कि खाद्य की महंगाई में कमी आ रही है, जिसका कारण सर्दियों के मौसम में सब्जियों की कीमतों में कमी और दालों की कीमतों में लगातार कमी है. वहीं, मंत्रालय ने कहा कि अनाज की महंगाई में लगातार गिरावट आ रही है, जो फरवरी 2025 में 6.1 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी.
वैश्विक स्तर पर निवेश प्रभावित हुआ
मंत्रालय ने टैरिफ संबंधी घटनाक्रमों के कारण भारत और अन्य देशों के समक्ष आने वाले व्यापार जोखिमों के बारे में भी चिंता जताई और संकेत दिया कि 2025 के लिए व्यापार का दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है. कई देशों में टैरिफ से संबंधित घटनाक्रमों ने व्यापार से संबंधित जोखिमों को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर निवेश और व्यापार प्रवाह प्रभावित हुआ है. वित्त वर्ष 2025 में अब तक भारत के निर्यात में धीमी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
महंगाई की समस्या को कम करना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि दालों की महंगाई दर 32 महीनों में पहली बार नकारात्मक क्षेत्र में चली गई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के रिटेल प्राइस के आंकड़ों के अनुसार टमाटर, प्याज और आलू (टीओपी) की कीमतों में कमी आई है, मार्च 2025 में टमाटर के लिए औसत मूल्य 21.3 रुपए प्रति किलोग्राम, प्याज के लिए 35.9 रुपए प्रति किलोग्राम और आलू के लिए 24.1 प्रति रुपए किलोग्राम होने का संकेत है. जबकि सब्जियों, अनाज और दालों में महंगाई की दर कम हुई है, खाद्य तेलों में महंगाई की दर बढ़ी है.
खरीफ और रबी खाद्यान्न उत्पादन
अनाजों में,खरीफ चावल उत्पादन में 6.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 1154.3 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 1.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. दालों में, अरहर और चने का उत्पादन 2.8 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, जबकि खरीफ तिलहन में 14.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है. खाद्य मुद्रास्फीति और उसके कारण मुख्य महंगाई पर दबाव कम हो रहा है, लेकिन खाद्य तेल की कीमतों का रुख निकट भविष्य में जोखिम पैदा कर सकता है. खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हाल ही में आई नरमी के कारण खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी 2025 में घटकर 3.6 प्रतिशत रह गई.